सेवा के लिए बड़े संसाधनों की नहीं बल्कि बड़े दिल और सच्ची भावना की आवश्यकता

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मजदूरी की कमाई से गौसेवा – सामाजिक कार्यकर्ता सत्येन्द्र सिंह गहलोत ने गोकुलधाम गौशाला को दिया गुप्तदान

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बदायूं, 11 मार्च 2026 को
जनपद बदायूं के गांव कोल्हाई निवासी सामाजिक कार्यकर्ता सत्येन्द्र सिंह गहलोत ने समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उन्होंने घायल और बीमार गौवंश के उपचार के लिए गोकुलधाम महातीर्थ गौशाला को आंशिक रूप से गुप्तदान दिया। उनका यह कदम न केवल गौसेवा के प्रति उनकी आस्था को दर्शाता है बल्कि समाज को दया, करुणा और मानवता का संदेश भी देता है।

सत्येन्द्र सिंह गहलोत ने बताया कि समाज में कई बार सड़क दुर्घटनाओं या अन्य कारणों से गौवंश घायल हो जाते हैं, जिनके उपचार और देखभाल के लिए गौशालाओं को आर्थिक सहयोग की आवश्यकता होती है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपनी सामर्थ्य के अनुसार गोकुलधाम महातीर्थ 🐄 गौशाला में दान दिया, जिससे घायल और बीमार गौवंश के उपचार में सहायता मिल सके।

गहलोत का मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति को जीव-जंतुओं के प्रति दया और संवेदना का भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि “गौवंश सहित सभी जीव भगवान की सृष्टि का हिस्सा हैं। उनके साथ मारपीट करना या उन्हें कष्ट देना मानवता के विरुद्ध है। सच्चा धर्म वही है जिसमें हम निर्बल और असहाय जीवों की सेवा करें और उनकी रक्षा करें।”

जब उनसे उनकी आय के स्रोत के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बड़ी सादगी से बताया कि वे एक मजदूर परिवार से आते हैं और मजदूरी करके ही अपना जीवनयापन करते हैं। उन्होंने कहा कि “मेरी आमदनी बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन जो भी कमाता हूं उसमें से थोड़ा हिस्सा समाजसेवा के लिए निकालने की कोशिश करता हूं। उसी से कभी गौदान, कभी कन्यादान और कभी जरूरतमंदों की मदद कर देता हूं।”
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स्थानीय लोगों का कहना है कि सत्येन्द्र सिंह गहलोत लंबे समय से सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहते हैं और समय-समय पर जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आते रहते हैं। उनका यह कार्य समाज के अन्य लोगों को भी प्रेरित करता है कि वे अपनी सामर्थ्य के अनुसार सेवा और सहयोग के कार्यों में भाग लें।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि ऐसे छोटे-छोटे प्रयास ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाते हैं। सत्येन्द्र सिंह गहलोत की यह पहल यह संदेश देती है कि सेवा के लिए बड़े संसाधनों की नहीं बल्कि बड़े दिल और सच्ची भावना की आवश्यकता होती है।
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