बदायूं में नकली पोटाश फैक्ट्री का भंडाफोड़, नमक से तैयार हो रहा था खाद! 300 बोरी नमक और 300 कट्टे जब्त
बदायूं। किसानों को खाद के नाम पर कथित तौर पर नकली पोटाश खपाने की तैयारी का बड़ा मामला सामने आया है। बिल्सी-इस्लामनगर रोड पर खैरी गांव के पास एक बंद लॉन में चल रही कथित नकली पोटाश फैक्ट्री पर कृषि विभाग ने छापा मारकर बड़ा खुलासा किया है। विभाग के अनुसार, यहां नमक से पोटाश तैयार कर उसे कट्टों में पैक किया जा रहा था।
जिला कृषि अधिकारी मनोज रावत के नेतृत्व में कृषि विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए मौके से भारी मात्रा में नमक, तैयार माल और पैकिंग में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया। कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री संचालक समेत कुल नौ लोगों को मौके से पकड़ा गया।
300 बोरी नमक, 300 कट्टे तैयार माल बरामद
छापेमारी में टीम को करीब 300 बोरी नमक मिला। इसके अलावा करीब 300 कट्टे तैयार पोटाश भी मौके से जब्त किए गए। अधिकारियों के मुताबिक, मौके पर 300 से 400 खाली कट्टे भी मिले हैं, जिनका इस्तेमाल पैकिंग के लिए किया जा रहा था।
फैक्ट्री में पैकिंग और सिलाई का पूरा इंतजाम मिला। टीम ने मौके से दो सिलाई मशीन, धागा, जनरेटर और करीब 3 से 4 किलो गेरू भी बरामद किया।
इंडियन पोटाश लिमिटेड के कट्टे भी मिले
कार्रवाई के दौरान मिले कट्टों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। कृषि विभाग के अनुसार, मौके से इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) के खाली और पैक कट्टे भी बरामद हुए हैं।
अब जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि इन कट्टों का इस्तेमाल कथित तौर पर तैयार किए जा रहे माल की पैकिंग में कैसे किया जा रहा था और तैयार माल की सप्लाई कहां की जानी थी।
कौन है कथित फैक्ट्री संचालक?
विभाग के अनुसार, मौके पर पकड़े गए कथित फैक्ट्री संचालक की पहचान आरिफ निवासी पठान टोला, सहसवान के रूप में हुई है। कृषि विभाग की टीम ने संचालक समेत कुल नौ लोगों को मौके से पकड़ा है।
अधिकारियों ने बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर मामले की आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
बिल्सी कोतवाली में दर्ज होगा मुकदमा
कृषि विभाग की ओर से मामले में बिल्सी कोतवाली में आवश्यक धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है। विभाग के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ 3/7 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
मामले की जांच में यह भी सामने आने की उम्मीद है कि कथित रूप से तैयार किए जा रहे नकली पोटाश की सप्लाई किन इलाकों में की जानी थी और इस नेटवर्क से और कौन लोग जुड़े हैं।
किसानों के लिए क्यों अहम है मामला?
आलू समेत कई फसलों में किसान बेहतर उत्पादन के लिए पोटाश आधारित उर्वरकों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में यदि मानकों के विपरीत या नकली उत्पाद किसानों तक पहुंचता है तो इससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।
बदायूं में हुई इस कार्रवाई के बाद कृषि विभाग की निगरानी अब जिले में खाद की बिक्री और सप्लाई से जुड़े अन्य ठिकानों पर भी बढ़ सकती है। बरामद सामग्री की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई के बाद पूरे मामले की तस्वीर और साफ होगी।




Thank you for your response. Please wait and we will reply to your query soon.