साध्वी डॉ परम प्रभा
संत, साहित्य और सैनिक की त्रिवेणी राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक :
साध्वीश्री लब्धियशा
अंतरराष्ट्रीय संस्थान अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी द्वारा प्रकाशित मासिक बाल पत्रिका ‘बच्चों का देश’ पत्रिका का तीन दिवसीय रजत जयन्ती समारोह रविवार को संपन्न हो गया। समारोह के तहत अणुविभा मुख्यालय चिल्ड्रन्’स पीस पैलेस राजसमंद के सभागार में चल रहे ‘राष्ट्रीय बाल साहित्य समागम’के समापन सत्र को संबोधित करते हुए साध्वी डॉ. परमप्रभा जी ने कहा कि धर्मगुरुओं और साहित्यकारों का प्रयास होता है कि बालकों में संस्कारों का बीजारोपण करें जो धरती पर स्वर्ग उतार सकें। इंटरनेट की वजह से आज बच्चों का बचपना खत्म होता जा रहा है। ऐसे में साहित्यकारों का दायित्व बनता है कि वे बच्चों को सुसंस्कारित करने वाले साहित्य की सर्जना करें।
साध्वीश्री लब्धियशा जी ने अपने उद्बोधन में संत, साहित्य और सैनिक की त्रिवेणी के योगदान को राष्ट्र के निर्माण के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने कहा था - “यदि आपके पास दो डॉलर हैं तो आप एक डॉलर से रोटी खरीदें और दूसरे डॉलर से पुस्तक खरीदें। रोटी आपका जीवन बचाएगी और किताब आपको जीने की कला सिखाएगी। उन्होंने कहा कि ‘बच्चों का देश’पत्रिका में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए महत्वपूर्ण सामग्री होती है।
अणुविभा अध्यक्ष अविनाश नाहर ने कहा कि अणुव्रत आंदोलन के तहत अणुविभा की ओर से चौवन प्रकल्प चलाए जा रहे हैं। उन्होंने साहित्यकारों से साहित्य सृजन के साथ ही अणुविभा के किसी प्रकल्प से जुड़कर अणुव्रत आंदोलन के प्रसार में सहभागी बनने का आह्वान किया।
तेरापंथ विकास परिषद् के सदस्य पदम् चंद पटावरी ने अणुविभा के संस्थापक व बच्चों का देश के जनक मोहनभाई को याद करते हुए कहा कि 25 वर्षों पूर्व जिस बीज का वपन किया गया था आज वो वट वृक्ष के रूप में हमारे सामने है। इस पत्रिका के आगे बढ़ने की प्रचुर सम्भावना है। अणुविभा के प्रबंध न्यासी तेजकरण सुराणा ने अपने तीन दिनों के अनुभव को अतुल्य बताते हुए कहा कि देश के 11 राज्यों के 85 साहित्यकारों को इस प्रकार गंभीर चिंतन-मंथन करते हुए देखना एक दुर्लभ अवसर रहा।
कार्यक्रम का संयोजन बच्चों का देश के संपादक संचय जैन ने किया और आभार ज्ञापन सह संपादक प्रकाश तातेड़ एवं अणुव्रत समिति राजसमंद के अध्यक्ष अचल धर्मावत ने किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में आर पी सारस्वत सहित संभागियों के दल ने अणुव्रत गीत का संगान किया। कार्यक्रम में अणुव्रत लेखक पुरस्कार से सम्मानित फारुख अफरीदी, बच्चों का देश के प्रबंध संपादक पंचशील जैन, भिक्षु बोधि स्थल के अध्यक्ष हर्ष नवलखा, कांकरोली सभ के अध्यक्ष लाभ जी बोहरा, आर के मार्बल केआर बी मेहता, अणुविभा के उपाध्यक्ष डॉ विमल कावड़िया. सहमंत्री जगजीवन चोरडिया, डॉ सीमा कावड़िया सहित बड़ी संख्या में अणुव्रती उपस्थित थे।
इस अवसर पर ‘बच्चों का देश’ पत्रिका के संपादक संचय जैन और सह संपादक प्रकाश तातेड़ ने अणुविभा अध्यक्ष अविनाश नाहर को पत्रिका के रजत जयन्ती विशेषांक की प्रति भेंट की। समारोह में अणुविभा अध्यक्ष अविनाश नाहर ने मुख्यालय से जुड़े कार्यकर्ताओं को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
राष्ट्रीय बाल साहित्य समागम के विभिन्न चर्चा सत्रों में बाल साहित्यकारों ने अपने विचार रखें। सम्मेलन में भाग लेने वाली सबसे छोटी उम्र 12 वर्ष की बाल साहित्यकार सुश्री पाखी जैन कक्षा 7, एमडीएस सी .सै.स्कूल उदयपुर की छात्रा ने बच्चों की मोबाइल की लत को बुरा बताया और इसके लिए सीधे-सीधे अभिभावकों को ही जिम्मेदार बताया। पाखी ने कहा कि अभिभावक बच्चों के साथ बैठकर पहले स्वयं पुस्तकें पढ़ें। कुछ समय बाद बच्चों में अपने आप रूचि बढ़ेगी। लेकिन अभिभावक स्वयं मोबाइल में लगे रहते हैं फिर बच्चों को दूर रहने के लिए कहते है जो ग़लत है। पाखी ने कहा कि अभिभावकों को स्वयं पहले बदलना होगा । बच्चे तो उसका अनुकरण करके स्वयं अच्छी आदतों को अपनाते जाएंगे। बाल साहित्य में रुचि जगाने के विषय पर बोलते हुए पाखी जैन ने कहा कि विद्यालय में भी प्रार्थना सत्र के शुरुआत में या कक्षा की शुरुआत में कक्षा अध्यापक द्वारा बच्चों को बाल साहित्य की पुस्तकें पढ़ने के लिए वितरित करनी चाहिए और कुछ दिन या सप्ताह के बाद उसमें से प्रश्न पूछने चाहिए। जो बच्चा अधिक सटीक उत्तर दे उसको प्रोत्साहन व पुरस्कार देना चाहिए। जिससे बच्चों में बाल साहित्य की पुस्तकें पढ़ने की ओर रूझान बढ़ेगा।
उदयपुर (राजस्थान) के बाल साहित्यकार मंगल कुमार जैन ने "बाल साहित्य का भविष्य चुनौती और समाधान,"विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि बाल साहित्य में समीक्षा लिखने वाले विद्वानों को नामचीन रचनाकारों की रचना की समीक्षा लिखने के साथ नवोदित साहित्यकारों की रचनाओं की भी समीक्षा करनी चाहिए, जिससे उनको भी पहचान, समर्थन और मार्गदर्शन मिल सके।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बाल साहित्य रचनाकार दिल्ली के दिविक रमेश, भोपाल के परशुराम शुक्ल और लखनऊ के सुरेंद्र विक्रम ने इस तीन दिवसीय आयोजन को एतिहासिक बताया और कहा कि जिस प्रकार की उच्च स्तरीय चर्चाएं यहाँ हुई है, वैसा दूसरे समारोहों में आज तक देखने को नहीं मिला। संभागियों का प्रतिनिधित्व करते हुए बीकानेर की संगीता सेठी, भोपाल की लता अग्रवाल, चमोली उत्तराखंड के मनोहर मनु. गाज़ियाबाद के रजनीकांत शुक्ल, उदयपुर की आशा पांडेय ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि हम यहाँ से समृद्ध हो कर जा रहे हैं। उन्होंने अणुविभा का परिसर, यहाँ के वातावरण, कार्यकर्ताओं के समर्पण और कार्यक्रमों की गुणवत्ता की मुक्त कंठ से सराहना की।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में गायत्री पब्लिक स्कूल धोइंदा के बच्चों ने "मैं हूँ बच्चों का देश" लघु नाटिका प्रस्तुत की जिसमें पत्रिका के 25 वर्षों की यात्रा के महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर किया गया।
वहीं राष्ट्रीय बाल साहित्य समागम के अंतर्गत “एक सफल बाल साहित्यकार होने के मायने” विषय पर हुए सत्र में नयन कुमार राठी ने विचार व्यक्त किए। सत्र की अध्यक्षता राजीव तांबे ने तथा संयोजन नीलम राकेश ने किया। इससे पहले सुबह छः बजे देश भर से आए साहित्यकार नौचोकी पाल पर पहुंचे तथा राजसमंद झील के किनारे सुरम्य वातावरण में योगाभ्यास किया।

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