शिक्षक दिवस के अवसर पर विचार गोष्ठी सह योजना बैठक का आयोजन।
शिक्षक को विशिष्ट नागरिक का दर्जा दिए जाने की उठी मांग।
अनुच्छेद 21 क का उल्लंघन है आठवीं तक की सशुल्क शिक्षा।
पंचायत राज विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध होगा सत्याग्रह।
जन दृष्टि (व्यवस्था सुधार मिशन) के तत्वावधान मे शिक्षक दिवस के अवसर पर विचार संगोष्ठी सह योजना बैठक का आयोजन संगठन के शिव पुरम बदायूं स्थित मुख्यालय पर किया गया। सर्व प्रथम केंद्रीय कार्यालय प्रभारी रामगोपाल द्वारा राष्ट्र राग "रघुपति राघव राजाराम......." का कीर्तन कराया गया, एम एल गुप्ता ने ध्येय गीत "जीवन में कुछ करना है तो..........." प्रस्तुत किया। सह जिला समन्वयक विपिन कुमार सिंह एडवोकेट ने संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया।
इस अवसर पर शिक्षक दिवस के उपलक्ष में आयोजित संगोष्ठी में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम पर विमर्श किया गया। साथ ही हिंदी दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम की योजना बनाए जाने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय सूचना अधिकार दिवस २८ सितम्बर से राष्ट्रीय सूचना अधिकार दिवस १२ अक्टूबर तक चलने वाले सूचना अधिकार जन जागरण पखवाड़ा की योजना बनाई गई। जिला पंचायत राज अधिकारी बदायूं के संरक्षण में पल रहे भ्रष्टाचार के विरुद्ध शीघ्र ही सत्याग्रह किया जाएगा। संगठन के सह जिला समन्वयक विपिन कुमार सिंह एडवोकेट के विरुद्ध थाना इस्लामनगर में पंजीकृत एस सी एस टी के झूठे मुकदमे को निरस्त न करने पर आंदोलन की योजना बनाई गई।
इस अवसर पर विचार व्यक्त करते हुए जन दृष्टि (व्यवस्था सुधार मिशन) के जनक हरि प्रताप सिंह राठौड़ एडवोकेट ने कहा कि शिक्षक के बिना विकसित भारत की कल्पना व्यर्थ है। देश में ऐसी नीतियां न बनाई जाए जो शिक्षक की गरिमा को अवमूल्यित करती हो। देश के द्वितीय राष्ट्रपति की जयंती को शिक्षक दिवस के रूप में इसलिए मनाते हैं क्योंकि वह शिक्षक थे, वर्तमान राष्ट्रपति भी शिक्षक हैं, अनेक संवैधानिक पदों को शिक्षकों ने सुशोभित किया है, स्वतन्त्रता आंदोलन में भी शिक्षकों का अतुलनीय योगदान रहा है, देश के भविष्य का निर्माण करने का दायित्व भी शिक्षक का है इन परिस्थितियों में शिक्षक को विशिष्ट नागरिक का दर्जा प्रदान करने के लिए संगठन देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री , गृह मंत्री व शिक्षा मंत्री को पत्र प्रेषित करेगा।
श्री राठौड़ ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 क आठवीं तक की निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार नागरिकों को देता है, राज्य का दायित्व है कि वह आठवीं तक की निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था करें, किंतु निजी विद्यालयों में आठवीं तक की सशुल्क शिक्षा लेने को बड़ी संख्या में बच्चे विवश हैं, जो इस मौलिक अधिकार का खुला उल्लंघन है। निजी विद्यालयों में अध्ययनरत आठवी तक के बच्चों का शिक्षा का समस्त व्यय सरकार वहन करें। अनुच्छेद 21 क को क्रियाशील बनाने के लिए राष्ट्र व्यापी अभियान चलाया जाएगा।
संगोष्ठी में प्रमुख रूप से मार्गदर्शक धनपाल सिंह, संरक्षक एम एल गुप्ता, केंद्रीय कार्यालय प्रभारी रामगोपाल, सह जिला समन्वयक विपिन कुमार सिंह एडवोकेट, सह तहसील समन्वयक कृष्ण गोपाल, श्री राम, नेत्रपाल, वीरेंद्र कुमार , दुष्यन्त कुमार आदि की सहभागिता रही।


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