जल जीवन मिशन के अरमानों पर पानी फेर रहे जिम्मेदार।

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जल जीवन मिशन के अरमानों पर पानी फेर रहे जिम्मेदार।


बदायूं - विकास खण्ड सहसवान क्षेत्र के कई गांव में इसी तरह से पानी का दोहन किया जा रहा है जैसा कि आप तस्वीरों में देख रहे हैं ये तस्वीरें विकास खण्ड सहसवान के गांव कोल्हाई से यहां हमने देखा कि जो लोग कमजोर वर्ग से हैं अशिक्षित हैं वह पानी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं और जो लोग शिक्षित हैं समझदार हैं जिनको देख कर अन्य लोग चलते हैं वह लोग जानबूझकर कर पानी का दोहन कर रहे हैं जैसा कि तस्वीर 2 में दिख रहा है और इस पूरे मामले में जिम्मेदार मौन रह कर वोटों की राजनीति के कारण से जल जीवन मिशन के अरमानों पर पानी फेर रहे हैं, इस पूरे मामले में जल जीवन मिशन भी कहीं न कहीं जिम्मेदार है कहीं टौंटी नहीं है तो कहीं पाइप खुले पड़े हैं, कहीं घरों से बाहर ही नल लगा दिए गए हैं।
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पानी को बचाने लिए गांव में सामाजिक कार्यकर्ता सत्येन्द्र सिंह गहलोत ने लोगों से अपील भी की निवेदन भी किया लेकिन कुछ लोगों ने अपनी आदत में कोई सुधार नहीं किया।

शायद लोग सोचते हैं कि पानी को बचाने से अपील करने वाले व्यक्ति को फायदा होगा, यदि लोग ऐसा सोचते हैं तो वह गलत सोचते हैं अपील करने वाले को कुछ नहीं मिलने वाला आइए विस्तार से जानते हैं।

 जल संकट से जूझ रहे कई राज्यों की परेशानी को देखते हुए केन्द्र सरकार ने नागरिकों की परेशानी का समाधान करने के लिए मिशन बनाया जिसका नाम जल जीवन मिशन रखा और इस मिशन के माध्यम से आज देश भर में हर घर जल पहुंच रहा है।

दुर्भाग्य यह है कि आज हम सब इस जल संकट से बचने के लिए प्रयास नहीं कर जानबूझकर अनावश्यक रूप से पानी का बहाव कर रहे हैं,और नल को खुला छोड़ रहे हैं तो कहीं समरसेवल से पानी का दोहन किया जा रहा है।

पानी की कीमत को उनसे पूछो जिनके जीवन में पानी का संकट रहा है, भारत में कई क्षेत्र जल संकट से जूझ रहे हैं, जिसमें उत्तर भारत में पंजाब हरियाणा और राजस्थान दक्षिण भारत में तमिलनाडु कर्नाटक और तेलंगाना और पूर्वी भारत में झारखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। ये क्षेत्र भूजल के अत्यधिक दोहन, कुशल जल प्रबंधन की कमी, और जल-गहन फसलों के उत्पादन के कारण प्रभावित हैं। और इन्हीं की तरह हमारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में कुछ समझदार नागरिक कार्य कर रहे हैं।


पानी की दो बूंद की कीमत अनमोल होती है जिसकी कीमत नहीं होती यदि व्यक्ति को अन्न न मिले,फल न मिले, तो वह महीनों जीवित रह सकता है यदि पानी दो दिन तक नहीं मिले तो वह व्यक्ति मृत्यु के द्वार की तरफ मुड़ने लगता है।

इसीलिए इस देश के सभी भाई बहनों से चाचा ताऊ से बस यही बारंबार बिनती है कि पानी को बचाएं नल को जरूरत अनुसार चलाएं।
सत्येन्द्र सिंह गहलोत सूचना एवं सामाजिक कार्यकर्ता



पानी की बचत अपने लिए नहीं अपनों के लिए कीजिए।

नाती पोतों के लिए आने वाली पीढ़ी के लिए कीजिए।।

यदि हम सब ने एक दिन में एक लीटर पानी को बचाने का प्रयास किया तो देश भर में करोड़ों लीटर पानी बचेगा।

आप ये मत सोचिए कि सामने वाला व्यक्ति पानी नहीं बचा रहा है तो हमारे बचाने से क्या होगा, यदि आप ऐसा सोच रहे हैं तो गलत सोच रहे हैं जानते हैं क्यूं जब आप ये ठान लेंगे कि हमें हर रोज पानी को कम से कम खर्च करना है और दो लीटर पानी अपने बच्चों को बचा कर रखना है तो आपके सामने वाला व्यक्ति भी आपको देख कर आज नहीं तो कल और कल नहीं तो परसों पानी को बचाने लगेगा और मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि जब आप ये नेक काम आज शुरू करते हैं तो आने वाले कल में आपको देख कर चार लोग और भी पानी को बचाने लगेंगे।

इस ब्लॉग के माध्यम से मैं समस्त देश वासियों से बार बार अपील करता हूं कि आप जल को बचाएं ये प्राकृतिक की अनमोल धरोहर है इसके बिना जीवन शून्य है।

छोटी सी कहानी जीवन का बड़ा हिस्सा बन सकती है।

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