हर घर नल, पर पानी नहीं: उझानी ब्लॉक की पंचायत फुलासी में ‘जल जीवन मिशन’ दम तोड़ता दिखा
गांव की महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे आज भी हैंडपंपों और असुरक्षित जल स्रोतों पर निर्भर हैं। गर्मी के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है जिससे उनका समय, स्वास्थ्य और सम्मान—तीनों प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यदायी संस्था और संबंधित विभाग ने केवल औपचारिकताएं पूरी कीं, जबकि वास्तविक आपूर्ति व्यवस्था आज तक चालू नहीं की गई। पाइपलाइन बिछाने, टंकी निर्माण और कनेक्शन देने के बाद भी जलापूर्ति न होना योजना की गंभीर विफलता को उजागर करता है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस गंभीर जनसमस्या पर जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। न तो कोई स्पष्ट जवाब दिया जा रहा है और न ही कोई समयसीमा बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद उन्हें केवल आश्वासन ही मिले, समाधान नहीं।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि योजना की स्थलीय जांच (ग्राउंड रिपोर्ट) कभी ईमानदारी से नहीं की गई। यदि उच्च अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो यह साफ हो जाएगा कि फुलासी पंचायत में “हर घर नल से जल” केवल फाइलों और रिपोर्टों में चल रहा है, जमीन पर नहीं।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी बदायूं एवं जल जीवन मिशन के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही हो तथा तुरंत जलापूर्ति चालू कराई जाए, ताकि गांव के लोगों को उनका संवैधानिक अधिकार—शुद्ध पेयजल—मिल सके।
यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो ग्रामीणों ने सामूहिक आंदोलन और उच्च स्तर तक शिकायत करने की चेतावनी भी दी है। सवाल साफ है—क्या जल जीवन मिशन का उद्देश्य केवल नल लगाना था, या सचमुच लोगों की प्यास बुझाना?


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