ज्ञान की बात
साथियों एक बात हमेशा याद रखना कि जीवन में कभी भी कितनी भी मुसीबत आ जाए लेकिन सत्य से मत डिगना ये आपकी वो शक्ति है जो आपके ईश्वर (अल्हा) ने आपको दी है इसी सत्य की प्राचीन कथा आपको सुनाता हूं।
महाराज हरिश चन्द्र को सत्य के लिए निमित बनाया गया । इसका फल महाराज को यह मिला कि उन्हीं के कुल सूर्यव॔श में भगवान श्री राम ने अवतार लिया और सत्य में लोगों की आस्था दृढ़ करना उनका मुख्य उद्देश्य था। सत्यमेव जयते यही हमारे धर्म शास्त्रों का निचोड़ है । सत्य पर अडिग रहना ये महाराज हरिश्चन्द्र के जीवन का उद्देश्य था । जीवन में न जाने कितनी बाधाएँ आईं , प्रलोभन दिये गये । लेकिन राजा को उनकी सत्यता से डिगा नहीं सके। सत्य की विजय हुई और आज भी सत्य की विजय होती है। सारे षड़यंत्रकारी हार गये और हार ते रहेंगे। इसी दौरान प्रमाणित किया गया कि सत्यमेव जयते । आजतक महाराज हरिश्चन्द्र का नाम सूर्य की की तरह आसमान में चमक रहा है एवं वेदों मे भी यही कहा गया है कि सत्य ही ब्रह्म है और ब्रह्म ही सत्य है । बाकी सब झूठी माया है । हम कलियुगवासियों को सिखाने के लिए किसी न किसी को तो आगे आकर कष्ट उठाना ही था और महाराज हरिश्चन्द्र से बढ़कर देवता , दैत्य और मानव में इससे अधिक योग्य कोई नहीं था और न है न होगा।
महाराज हरिश चन्द्र के सत्यता की खातिर राजपाट सब खत्म हो गया पुत्र भी स्वर्ग सिधार गया अपना स्वयं मरघट में जा कर नौकरी कर समय काटा। लेकिन अपने सत्य से नहीं डिगे अन्त में फिर उनकी सत्यता पर विजय हुई।
कहानी का सार बस यह कि हमें चाहें कितनी भी मुसीबत आ जाए लेकिन अपने धर्म से नहीं डिगना है अपनी सच्चाई पर ही रहना कलयुग में षड्यंत्रकारियों की संख्या अधिक है जो दानव वंश के वंशज हैं इनसे घबराना नहीं है।
विश्वास के साथ ईश्वर पर भरोसा रख कदम कदम आगे बढ़ाते जाना है। क्यूंकि झूठ टिक नहीं सकता, सत्य बिक नहीं सकता ... सत्य है कथा।
और षड्यंत्रकारी हैं वह तुमसे जीते जी कायर रहेंगे जब भी तुम्हारे सामने पड़ेंगे तो खुद को वह शर्मिन्दा महसूस करेंगे क्योंकि झूठ के पांव नहीं होते।
सनातन धर्म के अनुसार रामायण में चौपाई हैं।
जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।
जैसा कि सावन के अंधे को
हर वक्त हरा हरा ही दिखता है।


Thank you for your response. Please wait and we will reply to your query soon.