झूठे मुकदमों के साए में सामाजिक कार्यकर्ता: सत्येन्द्र सिंह गहलोत के मामले ने उठाए गंभीर सवाल।

RNK SOCIAL TV
0


उत्तर प्रदेश के जनपद बदायूं में सूचना एवं सामाजिक कार्यकर्ता सत्येन्द्र सिंह गहलोत को कथित रूप से झूठे एससी/एसटी एक्ट के मामले में फंसाने की कोशिशों का आरोप सामने आया है। यह प्रकरण केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा, निष्पक्ष कार्रवाई और कानून के दुरुपयोग जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करता है।

सूत्रों के अनुसार, कुछ पत्रकारों और डीएनटी महासभा से जुड़े पदाधिकारियों द्वारा पुलिस पर मुकदमा दर्ज कराने का दबाव बनाया जा रहा है। आरोप है कि बिना ठोस तथ्यों और निष्पक्ष जांच के कानूनी कार्रवाई कराने का प्रयास हो रहा है, जिससे एक ईमानदार सामाजिक कार्यकर्ता की प्रतिष्ठा, आजीविका और व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।

सत्येन्द्र सिंह गहलोत वर्षों से गरीबों, बेसहारा लोगों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए सक्रिय रहे हैं। वे सूचना के अधिकार और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाते रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि इसी सक्रियता के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। यदि ऐसे मामलों में झूठे मुकदमे दर्ज होते रहे, तो सामाजिक कार्यकर्ताओं में भय का माहौल बनेगा और वे जनहित के मुद्दे उठाने से पीछे हटने को मजबूर होंगे। इसका सीधा नुकसान कमजोर वर्गों को होगा, जबकि कमीशनखोरी और रिश्वतखोरी को बढ़ावा मिलेगा।

स्थानीय सामाजिक संरचना पर प्रकाश डालते हुए बताया जाता है कि जिस गांव में सत्येन्द्र सिंह गहलोत रहते हैं, वहां आसपास कोई अन्य ठाकुर परिवार निवास नहीं करता। जिस बस्ती में उनका घर है, वहां वे अकेले ठाकुर हैं, जबकि शेष आबादी दलित समाज की है। स्थानीय लोगों के अनुसार, उनके संबंध सभी समुदायों से सौहार्दपूर्ण रहे हैं और किसी भी दलित परिवार द्वारा उनके विरुद्ध सामूहिक या तथ्यात्मक शिकायत नहीं है। इसके विपरीत, कई स्थानीय लोग उनके समर्थन में सामने आए हैं।

आरोप यह भी है कि एक विशेष दलित परिवार निजी रंजिश के चलते उन्हें लगातार परेशान कर रहा है—उनकी रोज़ी-रोटी प्रभावित की जा रही है और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं। इससे क्षेत्र में अनावश्यक तनाव और अस्थिरता उत्पन्न हो रही है।

इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय, उत्तर प्रदेश, से मांग की है कि:
पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए।
कानून के दुरुपयोग और झूठे मुकदमे दर्ज कराने वाले कथित गिरोहों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
ईमानदार सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए सुरक्षा और संरक्षण की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब कानून का प्रयोग न्याय के लिए हो, न कि दबाव या प्रतिशोध के लिए। आवश्यकता इस बात की है कि सत्य सामने आए, निर्दोष को न्याय मिले और समाज में सौहार्द बना रहे, ताकि सामाजिक कार्यकर्ता बिना भय के जनहित में अपना कार्य जारी रख सकें।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Thank you for your response. Please wait and we will reply to your query soon.

एक टिप्पणी भेजें (0)
3/related/default