समाज सेवा के मार्ग में कठिनाइयाँ आना स्वाभाविक है,

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निस्वार्थ समाजसेवा की मिसाल: सत्येन्द्र सिंह गहलोत की संघर्षपूर्ण जीवन गाथा



मजदूर परिवार से होने के बावजूद निस्वार्थ भाव से समाजसेवा में निरन्तर सक्रिय रहने वाले सत्येन्द्र सिंह गहलोत के जीवन में कठिनाइयाँ लगातार बढ़ती जा रही हैं। भ्रष्ट तत्व हर मोड़ पर उन्हें झूठे और मिथ्या आरोपों में फँसाने का प्रयास करते रहे हैं। कई बार उनके विरुद्ध एससी/एसटी एक्ट जैसे गंभीर मामलों में पुलिस थानों में तहरीरें दी गईं।
कुछ कथित मीडिया कर्मियों एवं संगठनों द्वारा पुलिस प्रशासन पर झूठा मुकदमा दर्ज कराने का दबाव भी बनाया गया, लेकिन सत्येन्द्र सिंह गहलोत ने कभी सत्य और ईमानदारी का साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने भ्रष्टाचार के सामने घुटने टेकने के बजाय समाजसेवा के पथ पर डटे रहकर संघर्ष जारी रखा।

कौन हैं सत्येन्द्र सिंह गहलोत?

उत्तर प्रदेश के जनपद बदायूं के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित ग्राम कोल्हाई, जो जिला मुख्यालय से लगभग 32 किलोमीटर दूर है, वहीं सत्येन्द्र सिंह गहलोत का जन्म एक अत्यंत निर्धन परिवार में हुआ है। वे क्षत्रिय समाज (ठाकुर जाति) से संबंध रखते हैं।
उनके माता-पिता अशिक्षित हैं और दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

शिक्षा और पारिवारिक जीवन

सत्येन्द्र सिंह गहलोत ने कक्षा 8 तक की शिक्षा अपने गाँव कोल्हाई में ही प्राप्त की, जबकि आगे की शिक्षा उन्होंने उझानी से पूर्ण की है जो जनपद बदायूं का कस्बा है।
वर्ष 2006 में उनका विवाह बरेली निवासी अमन कुमारी चौहान से हुआ, जो जीवन के हर सुख-दुःख में उन्होंने अपने पति का दृढ़ता से साथ निभाया है।

संघर्ष का दौर और न्याय की लड़ाई

वर्ष 2016 में पात्रता के आधार पर सत्येन्द्र सिंह गहलोत को लोहिया आवास योजना के अंतर्गत एक आवास स्वीकृत हुआ, लेकिन गाँव के कुछ शरारती एवं प्रभावशाली तत्वों ने इसमें बाधा उत्पन्न कर दी।
परिणामस्वरूप, उन्हें अपने परिवार सहित 9 महीनों तक बेघर होकर रेलवे पटरियों के किनारे जीवन व्यतीत करने को मजबूर होना पड़ा।
इस दौरान वे न्याय की तलाश में हर सरकारी कार्यालय के चक्कर लगाते रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार में तीन बार अपनी फरियाद रखी और अंततः बदायूं स्थित मालवीय आवास गृह पर अनशन पर बैठ गए।
अनशन के तीसरे दिन उन्हें न्याय मिला और यहीं से उनके जीवन ने एक नया मोड़ लिया।

समाजसेवा का संकल्प

न्याय मिलने के बाद सत्येन्द्र सिंह गहलोत ने यह संकल्प लिया कि वे अब केवल अपने लिए नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे।
उन्होंने कमीशनखोरी, रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के विरुद्ध RTI एवं IGRS के माध्यम से आवाज़ उठाना शुरू किया।
वर्ष 2018 में वे जन दृष्टि व्यवस्था सुधार मिशन नामक सामाजिक संगठन से जुड़े। उनकी कार्यशैली, सक्रियता और ईमानदारी को देखते हुए संगठन के संस्थापक/अध्यक्ष हरि प्रताप सिंह राठौड़ ने उन्हें प्रदेश समन्वयक का दायित्व सौंपा तथा जन दृष्टि न्यूज़ का प्रभारी भी नियुक्त किया।

भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक कार्य

सत्येन्द्र सिंह गहलोत ने अनेक जनहित से जुड़े मामलों का पर्दाफाश कर व्यवस्था में सुधार कराया, जिनमें प्रमुख हैं—
सहसवान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रेबीज वैक्सीन की कालाबाज़ारी का खुलासा, इसमें कुछ कर्मचारी निलंबित हुए तो कुछ स्थानांतरण किए गए और काफी हद तक सुधार हुआ।
आधार कार्ड बनवाने में हो रही अवैध वसूली पर रोक
सौर ऊर्जा कूड़ेदान घोटाले का भंडाफोड़
राशन दुकानों पर घटतौली के मामलों का खुलासा
इसके अतिरिक्त उन्होंने सैकड़ों पात्र लोगों को
वृद्धा, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन
राशन कार्ड
आय प्रमाण पत्र
शौचालय
पीएम किसान सम्मान निधि
आभा कार्ड
किसानों को निःशुल्क बीज व कीटनाशक दवाएँ

जैसी सरकारी सुविधाएँ दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इतना ही नहीं, कई पीआरडी जवानों को  विभाग द्वारा परेशान किया जा रहा था वर्षों से अटके हुए वेतन को दिलाने में भी उन्होंने सक्रिय रूप से जवानों का सहयोग किया।

आजीविका और सेवा का संतुलन

सत्येन्द्र सिंह गहलोत निस्वार्थ भाव से समाजसेवा के लिए अपना पार्ट-टाइम देते हैं। शेष समय में वे अपने परिवार के भरण-पोषण हेतु दैनिक मजदूरी करते हैं।
उन्हें कंप्यूटर संचालन, वाहन चलाने तथा कृषि कार्यों का अच्छा अनुभव है, जिसके माध्यम से वे अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।

विचार और संदेश


सत्येन्द्र सिंह गहलोत का कहना है—
समाज सेवा के मार्ग में कठिनाइयाँ आना स्वाभाविक है, लेकिन मानव जीवन का उद्देश्य ही एक-दूसरे की पीड़ा को समझना और उसे दूर करने का प्रयास करना है। जो लोग सब कुछ जानते हुए भी अन्याय पर चुप रहते हैं, वे अपने मानव धर्म से विमुख होते हैं।
मुझमें जब तक साँस है, तब तक मैं मानव सेवा में लगा रहूँगा और भ्रष्ट तत्वों के विरुद्ध निरन्तर अपनी आवाज़ उठाता रहूँगा।”

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